समय के लय में मैंने कुछ सपने बुने थे
ख्वाहिशों के उड़ान में कुछ नगमे सुने थे
जाने कहा खो गए हैं सारे
सोचूं मै यह बैठे नदिया किनारे
तुतलाती बोली से बनाया था अपना भविष्य
बचपन की कहानियों में था कितना कशिश
कभी डॉक्टर तो कभी टीचर बनना था
और कभी खिलौने वाले जहाज़ पे आसमान में उड़ना था
समय के साथ सब बदल गया
कामयाबी की चाह में पूरा बचपन जल गया
कहाँ खो गए है वो सपने सारे
सोचूं मैं यह बैठे नदिया किनारे